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सारण में शादी के मंडप में बवाल! गीत सुनकर भड़का दूल्हा, बिना दुल्हन लौट गई बारात

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बिहार के सारण में एक शादी उस समय टूट गई जब पारंपरिक गीत सुनकर दूल्हा नाराज हो गया। मंडप में विवाद इतना बढ़ा कि बारात बिना दुल्हन लौट गई। सोशल मीडिया पर घटना जमकर वायरल हो रही है।

सारण/आलम की खबर:बिहार के सारण जिले से एक ऐसी शादी की कहानी सामने आई है जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। जिस शादी में खुशियों, हंसी और संगीत का माहौल होना चाहिए था, वहां कुछ ही मिनटों में ऐसा विवाद खड़ा हो गया कि आखिरकार बारात को बिना दुल्हन के लौटना पड़ा। वजह बनी एक पारंपरिक शादी का गीत, जिसे सुनकर दूल्हा इतना नाराज हो गया कि उसने मंडप में ही शादी की एक महत्वपूर्ण रस्म करने से इनकार कर दिया। देखते ही देखते माहौल बिगड़ गया और शादी टूटने तक बात पहुंच गई।पूरा मामला सारण जिले के रसूलपुर क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, धानाडीह गांव से बारात बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ योगिया गांव पहुंची थी। गांव में बारात के स्वागत की शानदार तैयारी की गई थी। बैंड-बाजा, डीजे, आतिशबाजी और नाच-गाने के बीच बारातियों का स्वागत हुआ। दूल्हे का भव्य स्वागत किया गया और जयमाला की रस्म भी हंसी-खुशी पूरी हो गई। दोनों परिवारों के लोग खुश नजर आ रहे थे और शादी का माहौल पूरी तरह उत्सव में बदल चुका था।

लेकिन शादी की मुख्य रस्मों के दौरान अचानक ऐसा मोड़ आया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। बताया जा रहा है कि सिंदूरदान से पहले पारंपरिक शिलारोहण की रस्म की तैयारी चल रही थी। इस रस्म में दूल्हे को दुल्हन के पैर को प्रतीकात्मक रूप से स्पर्श करना होता है। जैसे ही रस्म शुरू हुई, गांव की महिलाएं पारंपरिक लोकगीत गाने लगीं। गीत के बोल थे—“गिर गईल ए दूल्हा, हमरा बबुनी के गोड़वा पर गिर गईल…”।

यही गीत पूरे विवाद की वजह बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गीत सुनते ही दूल्हे का चेहरा बदल गया। उसे लगा कि महिलाएं उसका मजाक उड़ा रही हैं और उसकी बेइज्जती की जा रही है। पहले तो लोगों ने सोचा कि वह मजाक में नाराज हो रहा है, लेकिन कुछ ही देर में मामला गंभीर हो गया। दूल्हे ने साफ तौर पर कहा कि वह यह रस्म नहीं करेगा और किसी के पैर नहीं छुएगा।

मंडप में मौजूद पंडित और बुजुर्गों ने दूल्हे को समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि यह बिहार के कई इलाकों में निभाई जाने वाली पुरानी परंपरा है और ऐसे गीत शादी-ब्याह का हिस्सा माने जाते हैं। महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले ये गीत मजाकिया अंदाज में होते हैं और इन्हें शुभ माना जाता है। लेकिन दूल्हा अपनी बात पर अड़ा रहा। उसने रस्म करने से इनकार कर दिया और नाराजगी जाहिर करता रहा।

उधर दुल्हन पक्ष भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। परिवार के लोगों का कहना था कि शादी की सभी रस्में परंपरा के अनुसार ही पूरी होंगी। धीरे-धीरे दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। पहले मामूली कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाराती और घराती आमने-सामने आ गए। शादी में मौजूद मेहमान भी हैरान रह गए कि कुछ मिनट पहले जहां हंसी और गीत गूंज रहे थे, वहां अब विवाद और गुस्से का माहौल बन चुका था।

ग्रामीणों के अनुसार विवाद इतना बढ़ गया कि गांव के कुछ लोगों ने दूल्हे और उसके करीबी साथियों को अलग कमरे में बैठा दिया। आरोप है कि शादी की तैयारी और खर्च को लेकर भी बहस शुरू हो गई। दुल्हन पक्ष का कहना था कि इतनी बड़ी तैयारी के बाद अचानक शादी तोड़ना गलत है। वहीं दूल्हे पक्ष के लोग लगातार माहौल शांत कराने की कोशिश करते रहे।

रातभर पंचायत का दौर चलता रहा। गांव के बुजुर्ग, रिश्तेदार और स्थानीय लोग दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने में जुटे रहे। कई बार ऐसा लगा कि मामला सुलझ जाएगा, लेकिन दूल्हा रस्म निभाने को तैयार नहीं हुआ। दूसरी ओर दुल्हन पक्ष भी अपनी परंपरा से समझौता करने के पक्ष में नहीं था। आखिरकार घंटों चली बातचीत के बाद शादी रद्द कर दी गई।

इसके बाद बारात को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा। गांव में यह घटना चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है। लोग अलग-अलग तरीके से इस पूरे मामले को देख रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि दूल्हे को परंपरा का सम्मान करना चाहिए था, जबकि कुछ लोग इसे व्यक्तिगत स्वाभिमान से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अधिकतर लोगों का मानना है कि मामूली बात को इतना बढ़ाना दोनों परिवारों के लिए भारी पड़ गया।

यह घटना सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पूरे मामले पर तरह-तरह के मजेदार कमेंट और मीम्स शेयर कर रहे हैं। किसी ने लिखा कि “एक गीत ने पूरी शादी बिगाड़ दी”, तो किसी ने कहा कि “ईगो भारी पड़ गया और बारात खाली लौट गई।” कई यूजर्स इसे गांव की पारंपरिक शादी और आधुनिक सोच के टकराव के रूप में भी देख रहे हैं।

सामाजिक जानकारों का कहना है कि बिहार और पूर्वी भारत के कई इलाकों में शादी के दौरान महिलाओं द्वारा पारंपरिक लोकगीत गाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। इन गीतों में मजाक, तंज और हंसी-मजाक का मिश्रण होता है ताकि शादी का माहौल हल्का और मनोरंजक बना रहे। लेकिन बदलते समय के साथ कई लोग इन परंपराओं को अलग नजरिए से देखने लगे हैं, जिसके कारण ऐसे विवाद भी सामने आने लगे हैं।

फिलहाल यह अनोखी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। गांव के लोग अब भी उसी गीत और मंडप में हुए विवाद की बातें कर रहे हैं। जिस रात को यादगार खुशियों का मौका बनना था, वह अब एक वायरल कहानी में बदल चुकी है। एक पारंपरिक गीत ने ऐसा बवाल खड़ा किया कि दो परिवारों का रिश्ता बनने से पहले ही टूट गया और बारात को खाली हाथ लौटना पड़ा।

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